बोस मरे नहीं, बोस मरा नहीं करते

बोस मरे नहीं, बोस मरा नहीं करते

जीवंत केवल लोग ही रहें , ये बिल्कुल भी ज़रूरी नहीं विचारों की उम्र लोगों की उम्र से कहीं ज्यादा होती है ये साबित कर देने वाली शख़्शियत निश्चित ही अमर रहती हैं।

सुभाष चन्द्र बोस भी एक विचार हैं जो सदैव भारतीयों और हर क्रांति लाने वाले शख़्स में रहेगा बिल्कुल जीवंत। आज़ाद भारत के जिस ख़्वाब को सच करने की पहल बोस ने की वो सभी के सोच के परे थी।

जिस सोच का आलम ये है मुल्क के क्रांतिकारी हृदय में आज भी यही बात घर करती है के

"ना कोई खोज ख़बर पर
अब भी रस्ता  तकती है
आएगा फ़िर  लाल मेरा
ये भारत माता कहती है

मुक्त गगन में रहता होगा
या नारों के ही बीच कहीं
जहाँ कहीं हो भीड़ खड़ी
वो होगा उनके बीच वहीं

विश्वास जगाता रात बुझाता
दीप्तमान कोई बढ़ता  होगा
मशाल जलाए अँधियारों में
वो सबसे आगे चलता होगा

बनकर  कोई आज़ाद  परिंदा
आज़ाद  तराने  बुनता  होगा
धरती अम्बर  सब  कहते  हैं
सुभाष अभी भी ज़िंदा होगा

सुभाष अभी भी जिंदा होगा..."

©जया पाण्डेय 'अन्जानी'

©The modern poets

In loving memory of Netaji Subhash Chandra Bose

जन्मतिथि: 23 जनवरी 1897


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