Poetry

मौत से ठन गई-अटल बिहारी वाजपेयी
ठन गई! मौत से ठन गई! जूझने का मेरा इरादा न था, मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई। मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ, लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ? तू दबे पाँव, चोरी-…
जीना इसी का नाम है
कोई कोशिश जलते चिरागों-सी की तो जाए, ज्योत-सा जलकर के ज़िन्दगी जी तो जाए, कोई हिसाब है, किसी को कुछ देने का तो कहो, चलो फिर आज ये किताब भी भरी तो जाए...... - शितांशु रजत
″प्रभु” तुझ पर तरस आ जाता है
जब आप भगवान की परिस्थितियों को देखते हैं और उस पर संदेह करना शुरू करते हैं
The Word ‘Dead’, everything left unsaid
Are you saying the word ‘Dead’ That screaming voice asked, Did I just heard that..? With that silence in surroundings And picture of a life revolved around After a journey which was not enough Neither get the destination happily..... Nor even through the journey itself Weak and strong merged in tha…
ऐ ज़िन्दगी कुछ हौसला तो दे
कठिन समय से गुजरने के लिए ज़िन्दगी से प्रोत्साहन की उम्मीद